वेट लॉस के लिए सफेद चावल छोड़कर ब्राउन राइस खाना कितना सही है?
वेट लॉस जर्नी में अक्सर हम जिस चीज को सबसे पहले अपनी डाइट से बाहर करते हैं, वह है कार्बोहाइड्रेट और उसमें भी सबसे पहला नंबर आता है हमारे मनपसंद सफेद चावल का।
जी हां, आज सोशल मीडिया और फिटनेस की दुनिया में यह बात फैल चुकी है कि अगर छरहरी काया पानी है, तो सफेद चावल से दूरी बना लें और उसकी जगह ब्राउन राइस को अपनी थाली में शामिल करें।
हालांकि, क्या वजन घटाने का यह फॉर्मूला वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सही है? फरीदाबाद के एशियन अस्पताल की हेड डायटीशियन, कोमल मलिक के नजरिए से आइए समझते हैं इस दावे की असली सच्चाई।
सफेद चावल और ब्राउन राइस में क्या है फर्क?
मेडिकल साइंस के अनुसार, इन दोनों चावलों में सबसे बड़ा अंतर इनकी प्रोसेसिंग का होता है। जब खेत से धान आता है, तो ब्राउन राइस में उसकी बाहरी परतें- ब्रान और जर्म बरकरार रहती हैं। ब्रान में जहां खूब सारा फाइबर होता है, वहीं जर्म विटामिंस और मिनरल्स का खजाना है।
जब इसी ब्राउन राइस को मशीनों में डालकर पॉलिश किया जाता है, तो ये दोनों पौष्टिक परतें हट जाती हैं। इसके बाद जो सफेद हिस्सा बचता है, उसे ही हम ‘सफेद चावल’ कहते हैं।
इन दोनों के बीच तीन बड़े अंतर हैं:
फाइबर का खजाना: सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस में लगभग 2 से 3 गुना ज्यादा फाइबर पाया जाता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स: सफेद चावल का जीआई ज्यादा (लगभग 70-75) होता है, जो खून में शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ाता है। इसके विपरीत ब्राउन राइस का जीआई (50-55) मध्यम होता है, जिससे शरीर को धीरे-धीरे एनर्जी मिलती है।
पोषक तत्वों की ताकत: ब्राउन राइस में सफेद चावल के मुकाबले मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और बी-विटामिन्स कहीं ज्यादा मात्रा में होते हैं।
क्या ब्राउन राइस खाने से जादू की तरह कम होगा वजन?
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि वजन घटाने के लिए सबसे जरूरी नियम कैलोरी डेफिसिट है। अगर कैलोरी की बात करें, तो एक कटोरी सफेद चावल और ब्राउन राइस के बीच का अंतर बहुत ही मामूली, लगभग 10-20 कैलोरी होता है। इसलिए, केवल ब्राउन राइस खाना शुरू कर देने से आपका वजन रातों-रात कम नहीं हो जाएगा।
हालांकि, ब्राउन राइस दो तरीकों से वजन घटाने में आपकी मदद जरूर करता है:
देर तक पेट भरा रखना: इसमें मौजूद फाइबर को पचने में समय लगता है। इसलिए इसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती और आप अनहेल्दी स्नैकिंग से बच जाते हैं।
ब्लड शुगर कंट्रोल: कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह शरीर में इंसुलिन को अचानक से नहीं बढ़ने देता। इंसुलिन का स्थिर रहना फैट घटाने के लिए एक बहुत अच्छी स्थिति पैदा करता है।
क्या सफेद चावल को पूरी तरह ‘विलेन’ मान लें?
बिल्कुल नहीं! अगर आप सफेद चावल खाने के सही तरीके को समझ लें, तो यह आपके फिटनेस के सफर में कोई रुकावट नहीं डालेगा।
डॉक्टर की सलाह यह है कि चावल को अकेला खाने के बजाय उसे ‘कंट्रोल’ करें। अगर आप सफेद चावल को ढेर सारी हरी सब्जियों और दाल या प्रोटीन के साथ मिलाकर खाते हैं, तो आपकी पूरी मील का ग्लाइसेमिक इंडेक्स खुद-ब-खुद कम हो जाता है। यह शानदार कॉम्बिनेशन आपके मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है।
इसके अलावा, सफेद चावल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे पचाना बेहद आसान होता है। जिन लोगों को अक्सर गैस, ब्लोटिंग या पाचन की समस्या रहती है, उनके लिए ब्राउन राइस का भारी फाइबर पचाना कई बार मुश्किल हो सकता है।
एक्सपर्ट की सलाह
किन्हें खाना चाहिए ब्राउन राइस: अगर आप डायबिटीज, पीसीओडी जैसी समस्याओं या गंभीर मोटापे से परेशान हैं, तो सफेद चावल की जगह डाइट में ब्राउन राइस, बाजरा या क्विनोआ को शामिल करना आपके लिए एक बेहतरीन मेडिकल चॉइस होगी।
स्वस्थ लोगों के लिए नियम: अगर आप एक सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति हैं, जिनका मकसद सिर्फ वजन को संतुलित रखना है, तो आपको सफेद चावल से पूरी तरह तौबा करने की कोई जरूरत नहीं है।
वजन घटाने का सबसे बड़ा और असली मंत्र है ‘पोर्शन कंट्रोल’ यानी सही मात्रा में खाना। दो प्लेट भरकर ब्राउन राइस खाने से लाख गुना बेहतर है कि आप आधी कटोरी सफेद चावल को ढेर सारी सब्जियों और प्रोटीन के साथ मजे से खाएं।
सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस को अपनाना सेहत के लिए एक अच्छा कदम जरूर है, लेकिन वजन कम करने का यह इकलौता रास्ता नहीं है। आखिर में जीत इसी बात की होती है कि आपकी पूरी डाइट कैसी है और आप दिन भर में कितनी कैलोरी ले रहे हैं।



