नाइट सफारी से स्टार गेजिंग तक, क्यों लोगों के बीच तेजी से बढ़ रहा है नाइट टूरिज्म का क्रेज?
वो पहले की बात थी जब लोग दिन के उजाले में घूमना पसंद करते थे और अंधेरा होते ही अपने होटल या घर को लौट जाते थे। पिछले कुछ समय में टूरिज्म के इस ढर्रे में काफी बदलाव आया है। अब लोग सिर्फ सूरज की रोशनी में नहीं, बल्कि चांद की चांदनी में भी घूमने का मजा लेना चाहते हैं।
टूरिज्म के इसी उभरते ट्रेंज को नाइट टूरिज्म या नॉक्टोटूरिज्म कहा जाता है। इसमें लोग रात के समय टूरिस्ट स्पॉट्स पर घूमना या अलग-अलग एक्टिविटीज में शामिल होना पसंद कर रहे हैं। हालांकि, सोचने वाली बात यह है कि लोगों को रात में टूरिस्ट स्पॉट्स को देखना क्यों पसंद आ रहा है? आइए जानें इस बारे में।
साल 2025 में नोक्टोटूरिज्म एक नया ट्रेंड बनकर उभरा था। रात को नाइट क्लब्स या डिनर के साथ-साथ अब लोग रात के समय ऐतिहासिक इमारतें देखना, स्टार गेजिंग या कॉनस्टिलेशन ट्रैकिंग जैसी एक्टिविटीज में शामिल होना भी पसंद कर रहे हैं। लोगों को अब नाइट सफारी भी खूब पसंद आ रही है, जिसमें वे रात के अंधेरे में जंगली जानवरों को देखने का आनंद लेते हैं। साथ ही, कई जगहों पर नाइट एंड लाइट शोज भी शुरू हुए, जो लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। शहरों की भीड़ से दूर रात को खुले आसमान में तारों को देखना भी कई लोगों की ट्रैवल विश लिस्ट में शामिल है।
क्यों बढ़ रहा है इसका क्रेज?
गर्मी से राहत और आरामदायक मौसम- भारत जैसे गर्म देशों में दिन के समय चिलचिलाती धूप में घूमना थकाऊ हो जाता है। रात का ठंडा और खुशनुमा मौसम पर्यटकों को बिना थकान के लंबी दूरी तय करने और घंटों पैदल घूमने की आजादी देता है।
एक अलग और जादुई नजरिया- वही इमारत जो दिन में साधारण दिखती है, रात की स्पेशल लाइटिंग में बिल्कुल अलग और भव्य नजर आती है। रोशनी और सायों का खेल एक अलग तरह का विजुअल एक्सपीरियंस पैदा करता है जो फोटोग्राफी के शौकीनों को आकर्षित करता है।
समय की बचत- आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग दिन में काम करते हैं और रात के समय शहर को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। नाइट टूरिज्म उन्हें अपने समय का बेहतर इस्तेमाल करने की सुविधा देता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा- सरकारों के लिए भी नाइट टूरिज्म फायदे का सौदा है। जब पर्यटक रात में रुकते हैं, तो वे होटल, परिवहन और स्थानीय खान-पान पर ज्यादा खर्च करते हैं। इससे स्थानीय रोजगार बढ़ता है और पर्यटन स्थलों की आय दोगुनी हो जाती है।



